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नारी: शक्ति, संकल्प और समानता की प्रतीक
भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का प्रतीक माना गया है। वेदों में कहा गया है – “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:” अर्थात जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते हैं। प्राचीन काल से ही भारतीय समाज में नारी को उच्च स्थान प्राप्त था। वह शक्ति, ज्ञान और समृद्धि की प्रतीक मानी जाती थी। कालांतर में समाज में आई कुरीतियों के कारण नारी की स्थिति में गिरावट आई, लेकिन आज का युग नारी जागरण का युग है। आज की नारी अपनी शक्ति, संकल्प और समानता के लिए निरंतर संघर्षरत है।
शक्ति का प्रतीक: नारी में अपार शक्ति निहित है। वह जीवन को धारण करने की शक्ति रखती है। माँ के रूप में वह सृजन की शक्ति है, तो दुर्गा के रूप में वह संहार की शक्ति है। नारी की शक्ति का प्रमाण इतिहास के पन्नों में दर्ज है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती, अहिल्याबाई होल्कर जैसी वीरांगनाओं ने अपनी शक्ति का परिचय दिया। आधुनिक युग में इंदिरा गांधी, किरण बेदी, कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स जैसी नारियों ने अपनी प्रतिभा से यह सिद्ध किया कि नारी किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है।
नारी की शक्ति केवल बाहरी नहीं, आंतरिक भी है। वह धैर्य, करुणा, त्याग और सहनशीलता की प्रतिमूर्ति है। एक माँ अपने बच्चे के लिए किसी भी कठिनाई का सामना कर सकती है। एक पत्नी अपने पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती है। एक बेटी अपने माता-पिता का सहारा बनती है। इस प्रकार नारी विभिन्न रूपों में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करती है।
नारी का सामाजिक योगदान: समाज के निर्माण में नारी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वह बच्चों का पालन-पोषण कर भावी पीढ़ी को तैयार करती है। परिवार को एकजुट रखने में उसकी भूमिका अहम होती है। सामाजिक मूल्यों और संस्कृति के संरक्षण में भी नारी का योगदान महत्वपूर्ण है। आज की नारी घर की चारदीवारी से निकलकर समाज सेवा में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है। नारी की सामाजिक भूमिका को और मजबूत करने के लिए स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा रहा है। इन समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और सामाजिक मुद्दों पर अपनी आवाज उठा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों ने एक क्रांति ला दी है।
संकल्प की प्रतीक: नारी का संकल्प अटूट होता है। जब वह किसी लक्ष्य को प्राप्त करने का निश्चय कर लेती है, तो उसे कोई नहीं रोक सकता। मैथिलीशरण गुप्त ने कहा है – “अबला जीवन हाय! तुम्हारी यही कहानी। आँचल में है दूध और आँखों में पानी।“ लेकिन आज की नारी ने इस मिथक को तोड़ दिया है। वह अबला नहीं, सबला है। वह अपने अधिकारों के लिए लड़ना जानती है। आज की नारी शिक्षा, व्यवसाय, राजनीति, खेल, विज्ञान हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है। मेरी कॉम जैसी खिलाड़ी ने बॉक्सिंग में, सानिया मिर्जा ने टेनिस में, पी.वी. सिंधु ने बैडमिंटन में देश का नाम रोशन किया है। सुधा मूर्ति, किरण मजूमदार शॉ जैसी व्यवसायी महिलाओं ने कारोबार के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
नारी शिक्षा: नारी शिक्षा समाज के विकास की कुंजी है। एक शिक्षित महिला न केवल अपने परिवार का बल्कि पूरे समाज का विकास करती है। आज लड़कियां उच्च शिक्षा में लड़कों से आगे निकल रही हैं। मेडिकल, इंजीनियरिंग, प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में लड़कियों की संख्या बढ़ रही है। शिक्षा के कारण महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं और समाज में अपनी सार्थक भूमिका निभा रही हैं।
समानता की प्रतीक: समानता का अधिकार प्रत्येक मनुष्य का मौलिक अधिकार है। भारतीय संविधान में महिला और पुरुष को समान अधिकार प्रदान किए गए हैं। लेकिन व्यवहार में अभी भी असमानता विद्यमान है। नारी को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन इस संघर्ष में वह कभी हार नहीं मानती। आज नारी घर की चाहरदीवारी से निकलकर हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। वह पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है। वह अपने परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ व्यावसायिक जिम्मेदारियों का भी बखूबी निर्वाह कर रही है।
नारी सशक्तिकरण की दिशा में सरकारी प्रयास: सरकार द्वारा नारी सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, उज्ज्वला योजना, मुद्रा योजना जैसी योजनाएं महिलाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। महिला आरक्षण बिल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
चुनौतियाँ और समाधान: नारी को आज भी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। घरेलू हिंसा, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, बलात्कार जैसी समस्याएं आज भी विद्यमान हैं। कार्यस्थल पर भी उसे भेदभाव का सामना करना पड़ता है। लेकिन इन चुनौतियों से लड़ने के लिए आज नारी पहले से अधिक सशक्त और जागरूक है। इन समस्याओं के समाधान के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। समाज की मानसिकता में परिवर्तन लाना आवश्यक है। लड़का और लड़की में भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। दोनों को समान अवसर और शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
नारी का वर्तमान और भविष्य: वर्तमान में नारी की स्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों का नामांकन बढ़ रहा है। रोजगार के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। राजनीति में भी महिलाओं की भूमिका बढ़ रही है। पंचायती राज में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण ने ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाया है। इसी तरह नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2024 महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में भारत में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह अधिनियम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व और भागीदारी प्रदान करना है। यह कदम भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में लैंगिक असमानताओं को दूर करने और समाज में महिलाओं की स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव का संकेत देता है। इस अधिनियम से महिलाओं की राजनीति में अधिक भागीदारी सुनिश्चित होगी, जो उनके नेतृत्व और निर्णय-निर्माण की क्षमताओं को उजागर करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
डिजिटल युग में नारी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। तकनीकी क्षेत्र में महिलाएं अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। स्टार्टअप्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। सोशल मीडिया के माध्यम से महिलाएं अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं और समाज में बदलाव ला रही हैं। भविष्य में नारी की स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी। शिक्षा और आर्थिक स्वावलंबन के कारण वह और अधिक सशक्त होगी। समाज में उसकी भूमिका और महत्वपूर्ण होगी। वह अपने अधिकारों के प्रति और अधिक जागरूक होगी। नारी सशक्तिकरण से समाज का सर्वांगीण विकास होगा।
नारी शक्ति, संकल्प और समानता की प्रतीक है। वह अपनी क्षमताओं से न केवल अपना बल्कि पूरे समाज का विकास कर सकती है। महात्मा गांधी ने कहा था – “नारी का स्थान पुरुष से ऊँचा है।“ यह कथन आज भी प्रासंगिक है। नारी को अपनी शक्ति का एहसास है और वह अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत है। समाज को भी नारी के योगदान को स्वीकार करना होगा और उसे सम्मान देना होगा। तभी एक स्वस्थ और समतामूलक समाज का निर्माण होगा।
नारी की महिमा अपरंपार है। वह त्याग और तपस्या की मूर्ति है। वह करुणा और ममता की प्रतिमा है। वह शक्ति और साहस का प्रतीक है। वह संकल्प और दृढ़ता की मिसाल है। वह समानता और न्याय की पक्षधर है। ऐसी नारी शक्ति को नमन है, जो समाज को नई दिशा दे रही है, नई राह दिखा रही है।
डॉ. विनी शर्मा
सहायकाचार्या, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, सदस्या, हिन्दी प्रचार प्रसार संस्थान, स्वामी विवेकानंद बालिका शिक्षा समिति, जयपुर राजस्थान
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